Monday, 23 January 2023

१२ अन्तःकरण से जुड़े लोग

लहर लहर १२

अन्तःकरण से जुड़े लोग।

"भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्रा:"। अपनी आँखों से अच्छा देखो।
आँखें एक गेट वे है जरूर पर हर किसी को दिल तक जाने नहीं देती। एक बारीक से छेद में से ही पूरी दुनियाँ समा लेती है। तुमने कभी ध्यान नहीं दिया इस फर्स्ट गेट के आगे कॉमन हाल है जहाँ तक वे लोग पहुँचते हैं जो तुम्हारे साथ कोई न कोई रिश्ता रखते हैं या वहाँ पर ठहरने के लिये अपना स्थान बना लेता है। यह बहुत बड़ी जगह है जहाँ बहुत सारे लोग समा सकते हैं, रुक सकते हैं, बाहर भी निकल सकते हैं। इस कामन हॉल में कभी कभी बहुरूपिये, मुखौटेबाज, छलिया, और शरारती लोग भी पहुँच जाते हैं और विप्लव मचाते रहते हैं। इन्हें बेदखल करना बहुत मुश्किल होता है। उन्हें सम्हालने में बहुत सारी ऊर्जा खर्च हो जाती है। ये वायरस की तरह हमारे इम्यून सिस्टम पर ही अटेक कर देते हैं। ये बहुत बलशाली हैं और किसी भी एन्टीवायरस से भी मरते नहीं है पर इनके लिये क्वारन्टीन करने की जगह इसी हाल में रखना पड़ती है। यह हॉल भरता और खाली होता रहता है। फिर इसके आगे एक सिट आउट है यहाँ तक वे लोग आते हैं जो तुम्हारी इजाजत के इन्तेजार में रहते हैं। ये वे लोग है जो तुम्हारी मनोवृत्ति, रुचि अथवा पसन्द की कसौटी पर खरे उतरते हैं। यह सिट आउट इसलिये भी जरूरी है कि यहाँ फिर एक छ्ननी लगानी है। यहाँ से आगे का मार्ग बहुत महत्वपूर्ण है अन्यथा डेमेजकन्ट्रोल सम्भव नहीं होता है। ये वे लोग हैं जो तुम्हारे जीवन को, विकास को, गिरावट को, मन मस्तिष्क को पूरी तरह प्रभावित करते हैं। इस सिटआउट के बाद एक लिविंग रूम हैं जहाँ तुम इन चहेते लोगों के साथ रह सकते हो, व्यवहार कर सकते हो, आदान प्रदान कर सकते हो।   तुम इनके साथ पूरा जीवन साझा करते हो।
सिटआउट से सँटा हुआ सबसे अलग थलग एक गलियारा है जो सीधे तुम्हारे अन्तःपुर में पहुँचता है। अन्तःपुर तुम्हारा अपना अन्तःकरण ही है इसमें जो लोग पहुँच गये उन्हें तुम जन्म जन्मान्तरों का भूल नहीं सकते। ये वे लोग हैं जो तुम्हें और तुम इन्हें अच्छे लगते हो। जरूरी नहीं कि दुनियाँ जान सके कि ये कौन कौन लोग हैं। कभी कभी इसमें रहने वाले सक्ष भी नहीं जानते कि तुम उन्हें एक तरफा पसन्द करते हो। यहाँ देवत्व उतर आवे तो तुम भक्त बन जाते हो, दानव उतर आवे तो विध्वंसकारी हो सकते हो और यहीं अनन्त संभावनाएँ निर्मित होती हैं जो तुम्हारे भीतर बाहर की तमाम गतिविधियों और सम्पूर्ण जीवन को नियन्त्रित करती हैं। यह गलियारा तुम्हारे अपने नियन्त्रण में है। यहाँ पहुँचने और रहने वाले लोग सब रिश्तों को लाँघ कर आते हैं और किसी भी प्रकार के बन्धनों-अनुबन्धों से मुक्त रहते हैं। ये इस तरह साथ रहते हैं जैसे आँखों से कान और मुँह सिले हुए हों। ये अगर बाहर निकल भी जावें तो इनकी अमिट स्मृतियाँ वहीं परमानेन्ट बनी रह जाती हैं और तुम इनके वर्चुअल इफेक्ट में हमेशा ही रहते हो चाहे वह तुम्हारा गुरू हो, प्रेमी हो अथवा आदर्श हो। इनमें से भी कोई एकाध तुम्हारे संग दूध में घुली मिसरी की तरह रहता है। जिसे वह भी जानता है और तुम भी। वह अलेप है, लोभ आदि सभी विकारों से रहित है। चाहे वह पुरुष हो, प्रकृति हो या परमात्मा हो। इसे तुम से जुदा कोई नहीं कर सकता। 
"तुम्हारा अपना अन्तःपुर सिर्फ तुम्हारा है इसे तुम ही अच्छी तरह सम्हालो"।

रामनारायण सोनी 

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